
सोनभद्र।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से सोनभद्र की ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक उत्पादों के निर्माण के जरिए स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ रही हैं। गणेश आजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पंचगव्य से दीपक, धूपबत्ती और भगवान गणेश-लक्ष्मी की आकर्षक मूर्तियां तैयार कर रही हैं। दीपावली के अवसर पर इन उत्पादों की बढ़ती मांग से समूह की महिलाओं को अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।समूह की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसका उदाहरण पराग दूध की ओर से मिला 20 हजार दीपक और धूपबत्ती के एक हजार पैकेट का ऑर्डर है।

इस मांग से महिलाओं को बड़े स्तर पर उत्पादन करने और अपने स्वरोजगार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।एनआरएलएम के उपायुक्त रवींद्र वीर ने बताया कि समूह की महिलाओं को पंचगव्य से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिलाया गया है। पंचगव्य में गाय के गोबर, दूध, घी, दही और गोमूत्र जैसे घटकों का उपयोग किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को दीपक, धूपबत्ती और गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां तैयार करने के साथ ही उन्हें आकर्षक स्वरूप देने की जानकारी दी गई। स्वरोजगार शुरू करने और कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।उन्होंने बताया कि पारंपरिक स्वरूप और आकर्षक डिजाइन के कारण इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है। त्योहारों पर मिलने वाले अग्रिम ऑर्डर महिलाओं के लिए कारोबार के विस्तार की संभावनाएं पैदा कर रहे हैं।स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग और बाजार से जुड़ने के अवसर मिल रहे हैं। इससे वे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर अपने हुनर को आय के साधन में बदल रही हैं। पंचगव्य से उत्पाद तैयार करने की पहल पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने में भी सहायक हो रही है।गणेश आजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए यह पहल आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर बन रही है। बाजार से मिल रहे ऑर्डर और सरकारी मिशन के सहयोग से महिलाएं अपने काम को आगे बढ़ाने तथा परिवार की आय में योगदान देने की दिशा में प्रयासरत हैं।




