
सोनभद्र। तरिया में आदिवासी परिवारों और किसानों के आह्वान पर जल, जंगल, जमीन तथा अन्नदाताओं की उपजाऊ भूमि को बचाने के लिए पंचायत आयोजित की गई। इसमें किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे। उन्होंने जमीन पर बैठकर आदिवासी परिवारों और किसानों का दुख-दर्द सुना तथा उनकी समस्याओं को लेकर पंचायत को संबोधित किया।इस दौरान मोर्चा संयोजक संदीप मिश्र ने कहा कि आदिवासी अस्मिता और किसानों की जमीन बचाना हमारा मूल कर्तव्य है।

उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक विकास के नाम पर जनपद प्रशासन हजारों हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की योजना बना रहा है। इससे सोनभद्र को प्रदूषण की समस्या से जूझना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन पर कॉरपोरेट घरानों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोर्चा और सोनभद्र की जनता ऐसी नीतियों को बर्दाश्त नहीं करेगी।उन्होंने जनपद के जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे से सोनभद्र के आम लोगों को कोई विशेष लाभ नहीं होने वाला है। यदि क्षेत्र का वास्तविक विकास करना है तो कलवारी से खलियारी तक फोरलेन, मुड़धोवा से छत्तीसगढ़ बॉर्डर तक फोरलेन, हाथीनाला से मध्य प्रदेश बॉर्डर तक फोरलेन तथा हाथीनाला से विंढमगंज झारखंड बॉर्डर तक फोरलेन सड़क बनाई जाए। इसके साथ ही पटवध से पिण्डारी और पोखरिया तक सड़क का निर्माण कराया जाए।वहीं, पेड़ हैं तो प्राण हैं आंदोलन के संयोजक रामसूरत खरवार ने कहा कि जल, जंगल और जमीन हमारी धरोहर हैं। इन्हें किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लक्ष्मण वादी ने कहा कि यह लड़ाई आदिवासी अस्मिता और कॉरपोरेट ताकतों के बीच है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस संघर्ष में जीत आदिवासी समाज और किसानों की होगी।पंचायत में गुलाब चेरो, बिंदू खरवार, दिनेश पनिका, सुरेश गोण, विकास गोण, बिंदू अगरिया सहित सैकड़ों की संख्या में आदिवासी परिवारों के सदस्य और किसान मौजूद रहे।




