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*समय से पंचायत चुनाव न होने की स्थिति में निर्वाचित प्रधानों को ही बनाया जाए प्रशासक*

दुद्धी (सोनभद्र), 30 अप्रैल 2026।

ग्राम पंचायत मल्देवा की ग्राम प्रधान सीता जायसवाल ने माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन विकासखंड दुद्धी के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) आशुतोष श्रीवास्तव को सौंपा। ज्ञापन में पंचायतों के कार्यकाल समाप्ति के बाद उत्पन्न होने वाली संभावित प्रशासनिक स्थिति और उससे जुड़ी ग्रामीण जनजीवन की आवश्यकताओं को प्रमुखता से उठाया गया है। ज्ञापन के अनुसार, आगामी 26 मई 2026 को प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों का निर्वाचित कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में नई पंचायतों के गठन तक के अंतरिम समय में प्रशासनिक रिक्तता की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। प्रधान ने कहा है कि यदि इस अवधि में स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई, तो ग्राम स्तर पर चल रहे विकास कार्यों के साथ-साथ मजदूरी भुगतान एवं अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ेगा। प्रधान सीता जायसवाल ने अपने ज्ञापन में कहा है कि निर्वाचित ग्राम प्रधान स्थानीय परिस्थितियों, योजनाओं की वास्तविक जरूरतों और ग्रामीणों की समस्याओं से भली-भाँति परिचित होते हैं, जिससे कार्यों का संचालन अधिक प्रभावी और समयबद्ध तरीके से संभव होता है। इसके विपरीत, बाहरी प्रशासनिक व्यवस्था में कई बार समन्वय की कमी और निर्णय लेने में विलंब देखने को मिलता है। इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि कार्यकाल समाप्ति के बाद नई पंचायतों के गठन तक वर्तमान निर्वाचित ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाए।

साथ ही उन्हें सीमित एवं नियंत्रित वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं, ताकि पूर्व स्वीकृत एवं प्रचलित विकास कार्य, मजदूरी भुगतान तथा ग्राम की मूलभूत सेवाएं बिना किसी बाधा के संचालित होती रहें।ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया है कि किसी भी नए कार्य या योजना को प्रारंभ करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी की अनुमति अनिवार्य की जाए और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बना रहे।प्रधान ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों, विशेषकर महिला प्रधानों को प्रशिक्षण और सशक्तिकरण के माध्यम से सक्षम बनाया गया है। ऐसे में इस प्रशिक्षित नेतृत्व का उपयोग अंतरिम अवधि में भी किया जाना जनहित में आवश्यक है। गौरतलब है कि यह ज्ञापन ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और आमजन को प्रशासनिक असुविधा से बचाने के उद्देश्य से दिया गया है।

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