
सोनभद्र।उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का कमजोर होना और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। खासकर 45 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों की मजबूती बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। समय रहते सावधानी नहीं बरतने पर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का खतरा बढ़ सकता है, जिसमें हड्डियां कमजोर होकर मामूली चोट या गिरने से भी टूट सकती हैं। ऐसे में खानपान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हड्डियों को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।

मेडिकल कॉलेज के बी-ब्लॉक के नोडल डॉ. अवनीश शाह के अनुसार, हड्डियों और जोड़ों में होने वाली परेशानी को केवल बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है। इससे हड्डियां कमजोर और भुरभुरी होने लगती हैं। इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। समय पर पहचान और उचित देखभाल से इससे जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।डॉ. शाह बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोआर्थराइटिस यानी जोड़ों में घिसाव की समस्या भी हो सकती है। इसमें खासकर घुटनों, कूल्हों और हाथ-पैर के अन्य जोड़ों में दर्द, अकड़न तथा चलने-फिरने में परेशानी होती है। कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी भी हड्डियों और मांसपेशियों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। इसके कारण कमजोरी, दर्द और थकान महसूस हो सकती है।समस्या बढ़ने पर सीढ़ियां चढ़ना, लंबे समय तक खड़े रहना, पैदल चलना और जमीन पर बैठने के बाद उठना भी मुश्किल हो सकता है।

दर्द के कारण शारीरिक गतिविधियां कम करने से मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे परेशानी और बढ़ने का खतरा रहता है।हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार आवश्यक है। दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां, दालें और तिल जैसे खाद्य पदार्थ कैल्शियम की जरूरत पूरी करने में मदद करते हैं। वहीं, विटामिन-डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उचित मात्रा में धूप लेना भी फायदेमंद हो सकता है।हालांकि, शरीर में कैल्शियम या विटामिन-डी की कमी का पता चिकित्सकीय सलाह और जरूरत के अनुसार जांच से लगाया जाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक इनके सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।डॉ. शाह के अनुसार, हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधियां जरूरी हैं। उम्र और स्वास्थ्य के अनुरूप पैदल चलना, हल्का व्यायाम तथा मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां लाभकारी हो सकती हैं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना चाहिए। इसके अलावा धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से भी दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि इनका हड्डियों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।लगातार कमर या जोड़ों में दर्द, बार-बार गिरना, मामूली चोट में फ्रैक्चर होना, चलने-फिरने में परेशानी और शरीर के झुकाव में बदलाव जैसे लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियों की कमजोरी का जोखिम बढ़ सकता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार हड्डियों के घनत्व की जांच सहित अन्य परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं।डॉ. अवनीश शाह की सलाह है कि 45 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों की मजबूती के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, उचित मात्रा में धूप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। लगातार दर्द या अन्य परेशानी होने पर चिकित्सकीय परामर्श लें तथा बिना सलाह के कैल्शियम और विटामिन-डी की दवाओं का लंबे समय तक सेवन न करें।





