यूपीसोनभद्र

मारकुंडी घाटी में दम्पति की मौत का मामला पहुंचा अदालत, चार के खिलाफ एफआईआर का आदेश

तीन माह पुराने मामले में सीजेएम कोर्ट सख्त, चोपन पुलिस को एक सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट देने का निर्देश

सोनभद्र । मारकुंडी घाटी में पति-पत्नी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सीजेएम न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज की अदालत ने चोपन थानाध्यक्ष को दम्पति समेत चार लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने अथवा कराने का आदेश दिया है। साथ ही एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया है।यह आदेश रॉबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र के तिरनाही गांव निवासी बुल्लू यादव पुत्र नंदू यादव की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता रोशनलाल यादव के माध्यम से दाखिल प्रार्थना पत्र पर दिया गया। आवेदक ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत न्यायालय से कार्रवाई की मांग की थी।प्रार्थना पत्र के अनुसार, बुल्लू यादव के इकलौते पुत्र राहुल यादव की शादी छह मई 2026 को चोपन थाना क्षेत्र के सलखन स्थित बरवा टोला निवासी बबुन्दर यादव की पुत्री इंद्रावती उर्फ इंदु उर्फ चंदा से हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद चंदा करीब दस दिन ही ससुराल में रही। इसके बाद वह सलखन से रॉबर्ट्सगंज स्थित अस्पताल में नौकरी करने आती-जाती थी। राहुल उसे बाइक से अस्पताल छोड़ने जाता था।आवेदक का आरोप है कि घटना से कुछ दिन पहले राहुल को चंदा पर अधिक निगरानी रखने को लेकर धमकी दी गई थी। आठ जुलाई 2026 को राहुल चंदा से मिलने की बात कहकर घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। 12 जुलाई को राहुल और चंदा के शव मारकुंडी घाटी में मिलने की जानकारी मिली। आवेदक ने घटनास्थल पर बाइक सुरक्षित मिलने और दोनों के शव जले होने का हवाला देते हुए मामले में साजिश की आशंका जताई है।प्रार्थना पत्र में विकास सिंह पटेल, डॉक्टर राम भरोसे उर्फ राजबीर, बबलू यादव और उसकी पत्नी सविता यादव पर धमकी देने सहित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदक का कहना है कि घटना के बाद चोपन थाने में शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से सूचना भेजी गई। वहां से भी कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली गई।मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रोशनलाल यादव के तर्कों और पत्रावली के अवलोकन के बाद अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विवेचना आवश्यक मानी। न्यायालय ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने अथवा कराने और एक सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

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