
चोपन (सोनभद्र)। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर चोपन स्थित रामलीला मैदान में ‘नवधा भक्ति रस’ पर आधारित देवी जागरण एवं भक्ति-सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गुप्तकाशी विकास परिषद उत्तर प्रदेश, लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन) तथा जिला प्रशासन सोनभद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति, आध्यात्मिकता और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रयागराज और मिर्जापुर से आए कलाकारों ने भक्ति गीतों की प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण मां की भक्ति से सराबोर हो गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कवि जगदीश पंथी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति की आराधना, आत्मशुद्धि, साधना और लोकमंगल की भावना का उत्सव है। मां दुर्गा की उपासना से श्रद्धालुओं को शक्ति, साहस, विवेक और धर्मनिष्ठा की प्रेरणा मिलती है। यह पर्व समाज को सेवा, समर्पण, करुणा और सदाचार के मूल्यों से जोड़ता है।विशिष्ट अतिथि नवल किशोर चौबे ने कहा कि ‘नवधा भक्ति रस’ भारतीय भक्ति साहित्य, देवी आराधना और सांस्कृतिक परंपराओं की महत्ता को रेखांकित करता है। नवधा भक्ति के नौ स्वरूप—श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन—मनुष्य को श्रद्धा से साधना, साधना से सेवा और सेवा से लोकमंगल की ओर प्रेरित करते हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ समाजसेवी राजा मिश्रा ने कहा कि भक्ति को केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित न रखकर सामाजिक सद्भाव, मानवीय संवेदना, सांस्कृतिक एकता और लोककल्याण से जोड़ना आवश्यक है। देवी आराधना की परंपरा समाज में शक्ति, नारी सम्मान, साहस और धर्मपरायणता के मूल्यों को भी सुदृढ़ करती है।गुप्तकाशी विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पंडित आलोक कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ‘नवधा भक्ति रस’ भक्ति, साधना और सांस्कृतिक चेतना के समन्वय का सशक्त माध्यम है। सार्वजनिक सांस्कृतिक आयोजनों की सफलता समाज की सक्रिय भागीदारी, सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता और सामूहिक सद्भाव से सुनिश्चित होती है। ऐसे कार्यक्रम भारतीय परंपराओं के प्रति आत्मीयता बढ़ाने के साथ ही क्षेत्र के सांस्कृतिक वातावरण को समृद्ध करते हैं।कार्यक्रम के सहसंयोजक एवं श्रीरामलीला समिति चोपन के अध्यक्ष कमल किशोर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की लोक-सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्य, कथागायन और धार्मिक आख्यान हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। सोनभद्र की लोक परंपराओं में प्रकृति से निकटता, सामुदायिक सहभागिता और पारंपरिक उत्सवों की विशेष छाप दिखाई देती है।कार्यक्रम का संचालन करते हुए संयोजक एवं गुप्तकाशी विकास परिषद उत्तर प्रदेश के संरक्षक मनोज चौबे ने कहा कि परिषद उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से वर्षभर विभिन्न जनपदों में रामोत्सव, नवधा भक्ति रस, तीर्थायन यात्रा, कजरी महोत्सव और नारी वंदन जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन करती है। इनका उद्देश्य लोक परंपराओं का संरक्षण, सांस्कृतिक चेतना का विस्तार और नई पीढ़ी को अपनी आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना है।कार्यक्रम में पंडित आलोक कुमार चतुर्वेदी, जगदीश पंथी, राजा मिश्रा, उस्मान अली, कमल किशोर सिंह, नवल किशोर चौबे, सुनील सिंह, दीनदयाल सिंह, विकास चौबे, संतोष सिंह और बबलू सोनी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।




