
सोनभद्र। समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में बहुजन आंदोलन के महान चिंतक मान्यवर कांशीराम जी की पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में उनके संघर्षों, विचारों और सामाजिक न्याय के लिए किए गए योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कांशीराम जी ने दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और वंचित वर्गों को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता दिखाया। उनके विचार आज भी सामाजिक समानता और राजनीतिक भागीदारी की लड़ाई में प्रासंगिक हैं।सपा जिलाध्यक्ष राम निहोर यादव ने कहा कि मान्यवर कांशीराम जी का मानना था कि जिस समाज का इतिहास भुला दिया जाता है, उसका भविष्य कभी सुरक्षित नहीं हो सकता। उन्होंने दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, किसानों, नौजवानों और महिलाओं के अधिकारों के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष किया। उनके प्रयासों से बहुजन समाज में राजनीतिक चेतना का विस्तार हुआ और वंचित वर्गों को अपनी आवाज बुलंद करने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी गरीबों और वंचितों के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाएं और आगामी चुनाव में राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा घोषित प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताने के लिए पूरी ताकत से जुटें। उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने और सामाजिक न्याय की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।सांसद छोटेलाल सिंह खरवार ने कहा कि मान्यवर कांशीराम जी ने आदिवासियों सहित शोषित और वंचित समाज की आवाज बुलंद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया और सामाजिक सम्मान के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। सांसद ने कहा कि कांशीराम जी ने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों तथा संविधान की सामाजिक न्याय की भावना को आगे बढ़ाने का काम किया।उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव सभी वर्गों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को उनकी नीतियों और विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने भाजपा सरकार पर समाज के विभिन्न वर्गों के शोषण का आरोप लगाते हुए एकजुट होकर सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने की अपील की।

संगोष्ठी में पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह पटेल, प्रदेश सचिव चौधरी यशवंत सिंह पटेल, जिला महासचिव मोहम्मद सईद कुरैशी, अनिल प्रधान, त्रिपुरारी गौड़, सरदार पारब्रह्म सिंह, डॉ. लोकपति सिंह पटेल, सुरेश यादव, अभय यादव, जेपी भारती, लालू भारती, रमेश कुमार बागी, पंडित कृष्णा शर्मा, सत्यम पांडेय, बचोले प्रसाद पटेल, गुलाम यासीन, मिथिलेश कुमार सिंह, धीरज पाठक, दीपक केसरी और विनीत सरोज सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।




