850 सीटों का खेल या महिला सशक्तिकरण, सांसद बढ़ेंगे या देश पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ: मुशीर इक़बाल
ब्यूरो रिपोर्ट रिजवान सिद्दिकी

भदोही/उत्तर प्रदेश। महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर देश में बहस तेज होती जा रही है कालीन निर्यातक और कांग्रेस नेता मुशीर इक़बाल ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर आरोप लगाए हैं उनका कहना है कि जब वर्तमान में 543 सांसद ही देश की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं, तो संख्या बढ़ाकर 850 करना सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है उन्होंने कहा कि हर सांसद पर वेतन भत्ते, सुरक्षा यात्रा मेडिकल और अन्य सुविधाओं को मिलाकर लाखों रुपये प्रतिमाह खर्च होते हैं।

ऐसे में यदि सांसदों की संख्या बढ़ाई जाती है तो यह खर्च और अधिक बढ़ेगा जिसका सीधा असर देश के खजाने पर पड़ेगा। मुशीर इक़बाल ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन यह आरक्षण मौजूदा 543 सीटों के भीतर ही दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि सीटें बढ़ाकर राजनीतिक दल अपने हित साधने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण के तहत आम, गरीब, किसान या मध्यम वर्ग की महिलाएं आगे नहीं आ पाएंगी, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत और प्रभावशाली परिवारों की महिलाएं ही सांसद बनेंगी। उन्होंने उदाहरण के तौर पर बड़े राजनीतिक और फिल्मी परिवारों से आने वाली महिलाओं का जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने सवाल उठाया कि देश के कई राज्यों में एक ही दल की सरकार होने के बावजूद महिला मुख्यमंत्रियों की संख्या बेहद कम है, जिससे महिला सशक्तिकरण के दावों पर भी प्रश्नचिन्ह लगता है। मुशीर इक़बाल का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण चाहती है, तो वर्तमान सीटों पर ही आरक्षण लागू करे और अतिरिक्त खर्च से बचते हुए उन पैसों को विकास कार्यों में लगाए। इस पूरे मुद्दे पर अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस आलोचना पर क्या रुख अपनाती है और क्या लोकसभा सीटों में प्रस्तावित वृद्धि को लेकर कोई पुनर्विचार होता है या नहीं।





