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रोरवा गाँव में खुली नाली दे रहा है हादसों को न्यौता, लोगों के लिए बना परेशानी का सबब बैठक कर चंदा इकठ्ठा कर नाली निर्माण कराने की बनी सहमति, लोगों ने लगाया संबंधित के ऊपर सरकारी धन का बंदरबाँट करने का आरोप

कोन / सोनभद्र – नवसृजित विकास खण्ड कोन के ग्राम पंचायत रोरवा में इन दिनों लोक वित्त / राज्य वित्त / मनरेगा के मामले सहित भ्रष्टाचार में अव्वल दर्जा प्राप्त किया है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर प्रधान / प्रधान प्रतिनिधि व तत्कालीन सचिव द्वारा करोड़ों रुपये का बंदबाँट किया है जिसके क्रम में जिले के संबंधित अधिकारियों को शपथ पत्र देकर पूर्व में अवगत कराया जा चुका है जिसके क्रम में जिले से जाँच कमेटी गठित की गई है लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी क्रम में बतातें चलें कि ग्राम पंचायत खुली नाली की मरम्मत व ढक्कन लगवाने के लिए काँग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष/ स्थानीय निवासी मदन गुप्ता ने तत्कालीन सचिव / ग्राम प्रधान / ए डी ओ पंचायत को सेल फोन / मौखिक / लिखित/ मुख्यमंत्री पोर्टल व समाचार पत्रों के माध्यम से अवगत कराया किन्तु जनता की समस्याओं के निस्तारण के बावत उनके कान तक जूं तक नहीं रेंगा। विचारणीय है कि प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण कदम भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति तथाकथित अधिकारियों के मनमानी से फ्लॉप साबित होता प्रतीत हो रहा है। आईजीआरएस दिनांक 22 नवम्बर 2026 में उल्लिखित जिला पंचायतराज अधिकारी की जाँच आख्या में दिखाया गया है कि ग्राम पंचायत में नाली / ढक्कन का एडीओ (पं) कोन के द्वारा सत्यापन कराया गया जिसमें दिखाया गया कि उक्त कार्य हेतु सचिव द्वारा ग्राम पंचायत के पूरक कार्ययोजना में सम्मिलित कर एक माह के अंदर पूर्ण करा दिया जायेगा किन्तु उक्त निस्तारण प्रधान व प्रधान प्रतिनिधि के दबंगई से सिर्फ आज तक कार्य पूरा नहीं हो सका। बतातें चलें कि नाली मरम्मत / ढक्कन लगवाने के लिए सोमवार को पूर्व ग्राम प्रधान उदयचंद पासवान की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक के क्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि ग्राम पंचायत स्तर व खण्ड विकास अधिकारी तक नाली मरम्मत व ढक्कन लगवाने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा गुहार लगाई गई किन्तु ग्राम प्रधान के तानाशाही रवैये के कारण पूरा नहीं हो सका। जिस पर ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर सर्वसम्मति से चंदा इकठ्ठा कर निर्माण कार्य पूरा कराने की सहमति दे दी और भ्रष्टाचार के मामले में उच्च न्यायालय जाने का निर्णय लिया गया।

शिकायतकर्ता मदन गुप्ता का आरोप है कि विगत तीन वर्षों से नाली मरम्मत व ढक्कन लगवाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर/ विकास खण्ड/ जिला स्तर पर आवेदन पत्र दिया गया जिसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया कि आय दिन लोग/ पशु नाली में गिरकर चोटिल हो रहे हैं जो जनहित को देखते हुए मरम्मत व ढक्कन लगवाने लायक है किन्तु एडीओ ( पं) की उदासिनता के कारण कार्य पूरा नहीं हो सका बल्कि उनके द्वारा स्थलीय निरीक्षण के दौरान व कहा कि आप प्रधान से माफी मांग लें तभी कार्य कराना संभव है। इस विषय पर श्री गुप्ता को नागवार लगा और उन्होंने पुन : शपथ पत्र के माध्यम से प्रकरण से संबंधित अवगत कराया। पूर्व प्रधान प्रत्याशी / अपना दल (एस ) के पूर्व पदाधिकारी / सामाजिक कार्यकर्ता अनिल सिंह ने कहा कि जहाँ प्रदेश सरकार करप्शन व माफियाओं को मिट्टी में मिलाने के कटिवद्ध है वहीं ग्राम पंचायत रोरवा में बड़े पैमाने पर धन का बंदरबाँट किया गया है जो उच्चस्तरीय जाँच का विषय है और उन्होंने प्रदेश सरकार व सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जी व जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए उक्त प्रकरण में दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग किया है। इस बावत् एडीओ ( पं) सुनील पाल ने सेल फोन पर बताया कि मामला संज्ञान में है जिसके बावत ग्राम प्रधान / सचिव को अवगत करा दिया गया है । जिसके क्रम में संबंधित द्वारा ढक्कन का निर्माण करा दिया गया है और तत्काल ढक्कन लगवाने के लिए संबंधित को निर्देशित किया गया है। लेकिन स्थानीय लोगो का कहना है कि आखिर किन कारणों से अब तक ढक्कन नहीं लगवाया गया। वहीं शिकायतकर्ता से माफी मंगवाने वाले सवाल पर उन्होंने एक सिरे से खारिज कर दिया। खबर लिखे जाने तक उक्त नाली पर ढक्कन नहीं लगाया गया।सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर योगीराज में प्रधान बेलगाम क्यों हैं जबकि प्रदेश के मुखिया का स्पष्ट निर्देश है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी को बक्शा नहीं जायेगा। बैठक में मुख्य रूप से पूर्व ग्राम प्रधान उदयचंद पासवान, मंजू पासवान, अनिल सिंह, मुकेश भारती, अश्वनी भारती, गोरखनाथ, मदन गुप्ता आदि लोग उपस्थित रहे।

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