यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारियों में असंतोष
प्रधानमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग

दुद्धी (सोनभद्र)। यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारियों में असहजता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय यदि बड़े लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो इसका सीधा असर व्यापारियों के साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। इसी समस्या को लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल कमेटी दुद्धी के पदाधिकारियों ने बुधवार को प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी दुद्धी को सौंपा।
व्यापार मंडल कमेटी दुद्धी के अध्यक्ष अमरनाथ ने कहा कि दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर सभी प्रकार के लेनदेन में 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाए जाने तथा इसे 15 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने के प्रस्ताव से व्यापारी वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए व्यापारियों के हित में आवश्यक संशोधन करने का आग्रह किया।
व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान समय में कारोबार का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन माध्यमों से हो रहा है। ऐसे में पहले से ही विभिन्न प्रकार के कर एवं अन्य व्यावसायिक खर्च वहन कर रहे व्यापारियों पर अतिरिक्त एमडीआर शुल्क लगाया गया तो उनकी लागत बढ़ेगी। इसका असर व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और कारोबार में लगने वाली पूंजी पर भी पड़ सकता है।
अध्यक्ष अमरनाथ ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क के कारण व्यापारियों की परेशानी बढ़ने के साथ ही इसका अप्रत्यक्ष भार आम ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है। व्यापारियों ने आशंका जताई कि यदि यूपीआई लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है और नकद लेनदेन को फिर से बढ़ावा मिलने की संभावना बन सकती है।
उन्होंने कहा कि व्यापारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपनाकर सरकार की कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त आर्थिक भार लगाने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे व्यापारी और उपभोक्ता दोनों को सुविधा मिले।
ज्ञापन के माध्यम से व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने सरकार से प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क के निर्णय पर पुनर्विचार करने तथा व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन करने की मांग की। व्यापारियों ने कहा कि उनकी मांग किसी एक व्यापारी की नहीं, बल्कि पूरे व्यापारिक वर्ग की सामूहिक चिंता है। इस दौरान व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं।




