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ओबरा का अस्तित्व और स्वाभिमान,अब चुप रहना है अपराध 

विष अमृत संवाददाता आर एन सिंह

सोनभद्र – सोनभद्र एक जिला ही नहीं ऊर्जाचल के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यहां पर बिजली का उत्पादन के लिए कई पावर प्लांट लगाए गए हैं इन पावर प्लांट से निकलने वाले सारे प्रदूषण को यही की जनता झेलती है चाहे वह जल प्रदूषण हो वायु प्रदूषण हो या ध्वनि प्रदूषण हो यहां की बिजली से उत्तर प्रदेश का 70% हिस्सा रोशन होता है उसके बाद भी सोनभद्र की जनता की उपेक्षा करना बहुत ही नींदनिय है यहां के संविदा श्रमिकों से काम तो 12, 12 घंटे लिए जाते हैं लेकिन उनका पेमेंट तीन-तीन महीने बाद भी नहीं दिया जाता है और शपथ पत्रों के नाम पर उनका खूब शोषण होता है और ओबरा परियोजना द्वारा स्थापित परियोजना चिकित्सालय जो सिर्फ रेफरल अस्पताल के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है यहां पर अगर आपको कोई इमरजेंसी पड़ जाए तो आपको इलाज मिलना मुश्किल है क्योंकि यहां पर विशेषज्ञ डॉक्टरो की तैनाती न के बराबर है यहां का हॉस्पिटल स्वयं बीमारी से ग्रसित है इन सब बातों को सरकार के सामने रखने के लिए सोनभद्र की जनता की तरफ से सोन चेतना सामाजिक संगठन के संयोजक अभिषेक अग्रहरी 23 मार्च 2026 को स्थानीय गांधी मैदान से पदयात्रा का आवाहन किए हैं सोनभद्र की जनता चाहे वह जहां निवास करती हो उनसे विनम्र निवेदन के साथ उन्होंने अपील किया है कि अधिक से अधिक संख्या में इस कार्यक्रम में हिस्सा ले और अपनी बातों को रखें जिससे सरकार को पता चले कि अब सोनभद्र का युवा जाग चुका है और वह शोषण बर्दाश्त नहीं करेगा ! प्रदूषण के कारण यहां के पेड़ों का रंग हरा से बदलकर कला या माट मैला हो जाता है ! यहां पर खनन व्यवसाय भी बहुत जोर से होता है अगर आप दिन के समय भी खनन क्षेत्र से गुजरते हैं तो आपको उड़ने वाले धूल के कारण कुछ भी दिखाई नहीं देगा और आए दिन यहां के खदानों में मजदूर अपनी जान गवाते रहते हैं लेकिन सरकार को इससे कोई मतलब नहीं उन्हें तो सिर्फ अपने फायदे से मतलब है स्थानीय नेता विधायक और मंत्री सिर्फ अपनी रोटी सेकने में लगे रहते हैं !

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