*नगर पंचायत ओबरा में ईओ के चार्ज लेने के बाद भी वित्तीय अधिकार से वंचित,ठेकेदारों व कर्मचारी भुगतान ठप- राकेश केशरी*
ओबरा नगर पंचायत पंगु: ईओ मौजूद, फिर भी वित्तीय अधिकार फ्रीज़—कौन जिम्मेदार

नगर पंचायत ओबरा में वित्तीय अधिकार (फाइनेंशियल पावर) से संबंधित गंभीर लापरवाही सामने आई है। जानकारी के अनुसार शासन के आदेश पर पूर्व अधिशासी अधिकारी मधुसूदन जायसवाल के एटा तबादला के बाद डाला ईओ अखिलेश सिंह द्वारा दिनांक 12 जनवरी 2026 को नियमानुसार योगदान आख्या पूर्ण रूप से प्रस्तुत किए जाने के बावजूद अब तक संबंधित जिम्मेदार द्वारा बैंक में हस्ताक्षर प्रेषित नहीं किए गए हैं। इस कारण नगर पंचायत के समस्त वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।हस्ताक्षर लंबित रहने के चलते नगर पंचायत में कार्यरत ठेकेदारों का वैध भुगतान, कर्मचारियों एवं संविदा कर्मियों का वेतन/मानदेय, कार्यालयीन देयकों का भुगतान तथा अन्य आवश्यक वित्तीय कार्य पूरी तरह बाधित हैं।

भुगतान न होने से ठेकेदारों और कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है, जिसका सीधा असर नगर पंचायत के विकास कार्यों पर पड़ रहा है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार विकास कार्य ठप पड़े हैं, निर्माण एवं अनुरक्षण कार्य रुके हुए हैं और नगर पंचायत का दैनिक प्रशासनिक संचालन भी गंभीर संकट से गुजर रहा है। सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने के बावजूद वित्तीय अधिकार जानबूझकर लंबित रखे जाने की आशंका भी जताई जा रही है, जो शासन के स्पष्ट निर्देशों और प्रचलित वित्तीय नियमों का प्रत्यक्ष उल्लंघन मानी जा रही है।

इस संबंध में मांग की जा रही है कि यदि भुगतान में देरी के कारण कोई अप्रिय घटना, वित्तीय क्षति या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित की व्यक्तिगत रूप से तय की जाए। सेवा ही संकल्प के राकेश केशरी ने जिलाधिकारी सोनभद्र से प्रकरण का तत्काल संज्ञान लेते हुए अविलंब बैंक में हस्ताक्षर प्रेषित कराने के निर्देश देने तथा भुगतान में अनावश्यक विलंब और प्रशासनिक क्षति के लिए दोषी व्यक्ति/जनप्रतिनिधि की स्पष्ट जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि नगर पंचायत के समस्त वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्य पुनः सुचारु रूप से संचालित हो सकें।




