सोनभद्र के तहसील ओबरा के मनबरा में अवैध बालू खनन पर बड़ा खुलासा!
विष अमृत संवाददाता आर एन सिंह की (विशेष रिपोर्ट)

ओबरा तहसील के मनबरा क्षेत्र में संचालित रुद्रा माइनिंग एंड कंपनी के मोरंग खनन कार्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत एक विस्तृत आवेदन देकर खनन और वन विभाग से कई अहम जानकारियां मांगी गई हैं, जिससे इलाके में कथित अवैध खनन की परतें खुलने की संभावना बढ़ गई है।आवेदन में साफ तौर पर मांग की गई है कि ग्राम भगवा (खण्ड 15 च, खण्ड-2) में संचालित खनन कार्य के लिए जारी NOC/पट्टा की प्रमाणित कॉपी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि खनन शुरू होने से पहले संबंधित क्षेत्र का विभागीय निरीक्षण और सीमांकन किया गया था या नहीं।

*RTI में उठाए गए बड़े सवाल:* – # क्या खनन कार्य निर्धारित नियमों और समय सीमा (सूर्योदय से सूर्यास्त) के भीतर हो रहा है?, # पिछले 3 महीनों में क्षेत्र का कोई निरीक्षण या जांच हुई है या नहीं?, # क्या रात में खनन की अनुमति दी गई थी?, # अवैध खनन को लेकर अब तक कितनी शिकायतें मिलीं और उन पर क्या कार्रवाई हुई? ,# संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों (DFO/खनन अधिकारी) के नाम, पद और कार्यकाल क्या रहे? इसके अलावा, आवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया हो तो दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा विवरण प्रमाणित प्रतियों के साथ उपलब्ध कराया जाए। वही जनसुनवाई पोर्टल पर की गई शिकायत के बाद प्रशासनिक जवाब भी आया सामने है। मामले में विभाग की ओर से एक जवाब भी सामने आया है, जिसमें निरीक्षण के आधार पर खनन को( semi mechanised method) द्वारा काम कराने की पुष्टि भी हुई हुई है। जिसमें नियम विरुद्ध कार्य कराने का जिक्र किया गया है हालांकि, RTI के जरिए मांगी गई विस्तृत सूचनाएं आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई साफ हो पाएगी।
*बड़ा सवाल:* –
जब स्थानीय स्तर पर अवैध खनन की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो क्या विभागीय निगरानी पर्याप्त है? या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत से नियमों की अनदेखी हो रही है? ( आगे क्या? ) अब सबकी नजर RTI के जवाब पर टिकी है। यदि मांगी गई सूचनाओं में गड़बड़ी सामने आती है, तो यह मामला बड़े स्तर पर कार्रवाई और जांच का कारण बन सकता है।

निष्कर्ष: – मनबरा का यह मामला सिर्फ एक खनन साइट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की पूरी संभावना है।




