
दुद्धी/सोनभद्र। राष्ट्रीय चेरी जनजाति महासंघ ने सोनभद्र जिले के ओबरा विधानसभा के दिल्ली मार्कुंडी क्षेत्र में पत्थर खान हादसे में सात मजदूरों की दबकर मौत होने की घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए प्रदेश सरकार से कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीराम चेरी द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सोनभद्र आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां के लोग आज भी पिछड़ेपन का दंश झेल रहे हैं। आदिवासी समाज के उत्थान के लिए सरकार की योजनाओं और माननीय मुख्यमंत्री की पहल का सकारात्मक असर दिख भी रहा है, परंतु खनन क्षेत्र में लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता ने बड़ी त्रासदी को जन्म दिया।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि 15 नवंबर 2025 को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर जब प्रधानमंत्री का कार्यक्रम लाइव प्रसारित हो रहा था, ठीक उसी दौरान पत्थर खदान में हादसा हुआ। नियमों के अनुसार खदान बंद रहने का आदेश होने के बावजूद अवैध रूप से कार्य कराया गया, जिससे सात मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई।
महासंघ ने आरोप लगाया है कि मृतकों के परिजनों को अब तक आर्थिक सहायता और मुआवजा उपलब्ध नहीं कराया गया, जबकि मुख्यमंत्री द्वारा पीड़ित परिवारों को त्वरित सहायता दिए जाने का आदेश स्पष्ट है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और खान विभाग की लापरवाही से परिजन भयंकर समस्या झेल रहे हैं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि खनन क्षेत्र में अधिकतर आदिवासी मजदूर हैं, जिसकी अनदेखी होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पीड़ित परिवारों को 50–50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की गई है। साथ ही दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और खनन ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीराम चेरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि न्याय और मुआवजा देने में विलंब किया गया, तो आदिवासी समाज बड़ा आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा।





