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किसी भी सरकारी अधिकारी का स्थानांतरण एक दिखावा या भ्रष्टाचार की एक कड़ी

विषअमृत संवाददाता आर एन सिंह

ओबरा सोनभद्र ताजा मामला ओबरा नगर पंचायत का है कुछ दिन पहले अधिशाषी अधिकारी ओबरा (श्री मधुसूदन जायसवाल )जी का स्थानांतरण हुआ था और उनके स्थान पर डाला नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी को ओबरा नगर पंचायत का अतिरिक्त कार्य भार सोपा गया था कुछ दिनों बाद अध्यक्ष नगर पंचायत ओबरा द्वारा एक चिट्ठी जारी की जाती है और यह बताया जाता है कि अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत ओबरा श्री मधुसूदन जयसवाल जी मेडिकल छुट्टी लिए हुए थे और उनकी जॉइनिंग नगर पंचायत अध्यक्ष ओबरा द्वारा करा दिया जाता है सोचने वाली बात है कि एक राजपत्रित अधिकारी की जॉइनिंग जनता द्वारा चुने गए नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा कराया जाता है जबकि उनके स्थानांतरण की जानकारी नगर विकास अनुभाग द्वारा जारी की जाती है लेकिन उनके जॉइनिंग की जानकारी नगर विकास अनुभाग के द्वारा नहीं दी जाती है यह जानकारी नगर पंचायत अध्यक्ष के द्वारा जारी की जाती है

इससे यह साबित होता है कि भ्रष्टाचार पूरे प्रदेश में किस तरह से अपनी जड़े जमा चुका है सोशल मीडिया पर यह उपलब्ध पत्र की सत्यता की पुष्टि तो हम नहीं कर सकते लेकिन ऐसा है तो उच्च न्यायालय का निर्देश यथास्थिति के लिए है और यथा स्थिति में वे मेडिकल पर है ,ट्रांसफर आदेश रिसीव करने के साथ ही जायसवाल जी कार्यमुक्त हो गए थे ,और उच्च न्यालय का पदग्रहण या पदमुक्त करने का निर्णय विभाग के ऊपर छोड़ा गया है ,प्रमुख सचिव के निर्देश पर जिलाधिकारी इसे क्रियान्वित कर सकते है ,यह अधिकार नगर पंचायत अध्यक्ष के किस नियमावली में आ गया ,EO सरकारी सेवक है उसे अपने विभाग का आदेश का पालन करना होता है ,
खैर ऐसी कौन सी मिली भगत है जिसके बचाने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है ,पहले का अंदेशा और गहरा होता जा रहा है जनता के लिए अब यह ट्रांसफर पोस्टिंग के आड़ में कहीं वित्तीय अनियमितता का खेल तो नहीं ! !!
स्वतंत्र एजेंसी से जाँच की माँग होनी चाहिए ,आख़िर किसी के लिए ओबरा नगर पंचायत की कुर्सी ही क्यों महत्वपूर्ण है ?

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