इमोशनल वेल-बीइंग कार्यशाला सम्पन्न: शिक्षकों ने कहा—‘स्वपूर्ण पाठ्यक्रम से बदल जाएगी बच्चों की सोच’
उपेंद्र तिवारी महुली/दुद्धी/सोनभद्र

सोनभद्र। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के सभागार में आयोजित चार दिवसीय इमोशनल वेल-बीइंग कार्यशाला शनिवार को उत्साहपूर्ण माहौल में सम्पन्न हो गई। समापन सत्र में शिक्षक एक-दूसरे को प्रमाणपत्र देते हुए खासे भावुक नजर आए। शिक्षकों ने माना कि यह कार्यशाला न सिर्फ उनके पेशेवर जीवन बल्कि व्यक्तिगत सोच पर भी गहरा प्रभाव छोड़ गई है।
शिक्षकों का कहना था कि स्वपूर्ण पाठ्यक्रम के माध्यम से मिली सीख अब वे अपने विद्यालयों में छात्रों तक पहुँचाने के लिए उत्सुक हैं। कई शिक्षकों ने साफ कहा कि यह प्रशिक्षण उनके करियर का सबसे प्रभावी और यादगार अनुभव रहा।

स्वपूर्ण कालांश से बदलेंगे कक्षा 9 के सत्र
समग्र शिक्षा (माध्यमिक) उत्तर प्रदेश और मेधा लर्निंग फाउंडेशन की संयुक्त पहल पर चल रहे स्वपूर्ण कालांश के अंतर्गत जिले के राजकीय विद्यालयों की कक्षा 9 में प्रति सप्ताह सामाजिक-भावनात्मक सीख, 21वीं सदी के कौशल और करियर जागरूकता से जुड़े सत्र आयोजित किए जाएँगे।
इस पाठ्यक्रम को खासतौर पर किशोर छात्रों के मानसिक और भावनात्मक विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
नई शिक्षा नीति का अहम हिस्सा—भावनात्मक वातावरण
कार्यक्रम से जुड़े पीएएमओयू सदस्य श्री ललित जोशी ने बताया कि नई शिक्षा नीति में सामाजिक-भावनात्मक माहौल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसी दिशा में ‘स्वपूर्ण’ पाठ्यक्रम बच्चों को अपनी भावनाओं को समझने, व्यक्त करने और भविष्य का सही मार्ग तय करने के लिए प्रेरित करता है।

45 शिक्षकों ने सीखे गतिविधि-आधारित तरीके
चार दिवसीय प्रशिक्षण में 45 शिक्षकों ने भाग लिया। इस दौरान उन्होंने गतिविधि-आधारित शिक्षण, कक्षा में सकारात्मक वातावरण निर्माण, समूह कार्य संचालन और विद्यार्थी डायरी के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण कौशलों का प्रशिक्षण लिया।
शिक्षकों ने बताया कि अब वे विद्यार्थियों को अधिक संवेदनशील, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाने पर विशेष फोकस करेंगे।

सफल आयोजन के लिए टीम की सराहना
कार्यशाला का संचालन ललित जोशी, अंकित पटेल व डॉ. अजय यादव ने किया। वहीं संपूर्ण कार्यक्रम जिला विद्यालय निरीक्षक जयराम सिंह के निर्देशन में तथा व्यवस्थाएँ जिला समन्वयक अरविंद सिंह चौहान द्वारा सुनिश्चित की गईं।



